Wed. Apr 17th, 2024
Chitrakoot News जंगलों को वन माफिया पहुंचा रहे क्षति टाइगर

सतना न्यूज़ आज – आपका आज का स्रोत सतना शहर की खबर। हमारी टीम सतना नगर की ताज़ा और महत्वपूर्ण ख़बरों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है।

आज, हम आपके साथ एक नई ख़बर साझा करना चाहते हैं Satna News Today

चित्रकोट न्यूज़: रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के दुर्गम और घने जंगलों में वन्यजीवों के लिए आवास बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। जिम्मेदारों की मिलीभगत से लोग उन जंगलों को भी नष्ट करने में लगे हैं। मारकुंडी क्षेत्र के जंगलों में दिन-रात हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है और कीमती पेड़ों की लकड़ी लोडरों में लादकर सीधे एमपी के रास्ते बाहर ले जाई जा रही है। पाठा के जंगलों में शीशम, खैर, बिजहरा, बांसा, सदान आदि कीमती लकड़ियों के पेड़ हैं।

विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से इन बेशकीमती पेड़ों को बेखौफ काटा जा रहा है। मारकुंड रेंज द्वितीय क्षेत्र में आने वाले दादरी, लखनपुर, पचपेड़ा, रुखमा, जमुनिहा, टिकरिया, छेरिहा, भेड़ा आदि आरक्षित वन क्षेत्र आते हैं। इसमें बहुमूल्य वृक्षों के साथ-साथ जड़ी-बूटियों का भी भंडार है। इसके अलावा इन वनों में गुलबाघ, भालू, सांभर हिरण जैसे वन्य जीवों की संरक्षित प्रजातियाँ भी निवास करती हैं। लेकिन जंगलों में हरे-भरे पेड़ों की कटाई के कारण इन वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिख रहा है। खास बात यह है कि कर्मचारियों से मिलकर कीमती पेड़ों को कटवाने के बाद रात में उनकी लकड़ी को लोडर में लादकर एमपी के रास्ते सतना की ओर ले जाया जाता है। पहले भी कई बार लकड़ी लदे लोडर पकड़े जा चुके हैं। फिर भी पाठा के जंगलों में अवैध कटान करने वाला गिरोह लगातार सक्रिय है।

वन भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है

इस इलाके में पहाड़ से लेकर मैदान तक जंगल अतिक्रमण की चपेट में हैं. इस क्षेत्र में उपजाऊ और बहुमूल्य वन भूमि होने के कारण लोग वनकर्मियों की मिलीभगत से जंगल के हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काटकर उससे आय अर्जित करते हैं और फिर जब खेत तैयार हो जाता है तो अवैध रूप से खेती करना शुरू कर देते हैं। बताया जाता है कि ऐसे कई स्थान हैं जहां पहले बगान तैयार कर वृक्षारोपण किया जाता था, लेकिन वर्तमान में दबंग द्वारा खेती करायी जा रही है. इसमें वनकर्मियों को भी उनका वाजिब हिस्सा मिलता है.

जिम्मेदारियों के चलते सरकारी आवासों में न रहने से कर्मचारी बेलगाम हो गए हैं

हालांकि वन विभाग ने हर जगह क्षेत्रीय रेंज कार्यालय परिसरों में रेंजरों और अन्य कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास बनाए हैं, लेकिन उनमें कुछ छोटे कर्मचारी ही रहते हैं। मारकुंडी रेंज कार्यालय में रेंजर व अन्य जिम्मेदार लोगों की अनुपस्थिति के कारण कर्मचारियों की मिलीभगत से वन संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अधिकारी ज्यादातर तहसील और जिला मुख्यालयों में बने आवासों में रह रहे हैं। वह हर दो-चार हफ्ते में अपने कार्यस्थल पर जाते हैं. ज्यादातर काम मुख्यालय पर ही होता है. इसी लापरवाही के चलते शिकारियों के गिरोह सक्रिय हैं।

रानीपुर टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक पीके त्रिपाठी ने बताया कि जंगलों की सुरक्षा के लिए हर वीट पर कर्मचारी तैनात हैं। अभी कहीं से कटान संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली है। समय-समय पर वह स्वयं पाठा क्षेत्र में जाकर जंगलों का निरीक्षण करते हैं। वन्यजीवों को बचाने के लिए शिकारियों पर नजर रखी जा रही है। यदि कोई भी कर्मचारी कटान में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हम निरंतर नवीनतम और महत्वपूर्ण ख़बरों को आपके सामने पेश करने के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए हमारी वेबसाइट पर और भी ख़बरों के लिए बने रहें। हमारे समुदाय का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद!
Satna News Today

#Chitrakoot #News #जगल #क #वन #मफय #पहच #रह #कषत #टइगर #रजरव #क #खतर #News #Track #Hindi #Newstrack

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *