Wed. Apr 17th, 2024
मैहर में सिंधिया की ‘प्रतिष्ठा दांव पर भाजपा के बागी

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मैहर. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अलावा मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में भी एक विधानसभा सीट है जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर है. यह नवगठित मैहर जिले की मैहर विधानसभा सीट है. आमतौर पर यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच होता है, लेकिन इस बार सत्ताधारी पार्टी के एक बागी ने अपनी पार्टी बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

हाल ही में मैहर को सतना से अलग कर नया जिला घोषित किया गया। इसका श्रेय लेने के लिए बीजेपी और कांग्रेस में होड़ मची हुई है. अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर मौजूदा बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने ‘विंध्य जनता पार्टी’ (वीजेपी) बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. इस बार बीजेपी ने इस सीट से त्रिपाठी का टिकट काट दिया और सिंधिया के करीबी श्रीकांत चतुर्वेदी को टिकट दे दिया. चतुर्वेदी ने पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन वह त्रिपाठी से करीब तीन हजार वोटों के अंतर से हार गये थे. जब सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत कर कमल नाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिराकर भाजपा का दामन थामा तो मैहर के श्रीकांत चतुर्वेदी भी उनके साथ आ गए।

कांग्रेस ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष को दिया टिकट
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंधिया की वजह से ही बीजेपी ने चतुर्वेदी को मैहर से अपना उम्मीदवार बनाया है, इसलिए यहां उनकी ‘प्रतिष्ठा’ भी दांव पर है. ब्राह्मण और कुर्मी वोटरों के प्रभाव वाली इस सीट पर कांग्रेस ने पंजाबी समुदाय से आने वाले मैहर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश घई पर दांव लगाया है. मैहर में पंजाबी बहुत कम हैं, लेकिन घई का व्यापारी वर्ग में अच्छा प्रभाव माना जाता है। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है जो किसी भी राजनीतिक दल का समीकरण बना या बिगाड़ सकते हैं.

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इस बार ‘गन्ना’ पर है जोर
मैहर-अमरपाटन रोड पर ढाबा चलाने वाले अशोक कुमार दुबे ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मैहर से जनता दल (अविभाजित) और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार भी एक-एक बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन ज्यादातर मौकों पर मुकाबला कांटे की टक्कर का रहा. भाजपा. और कांग्रेस के बीच ही रह गए हैं. उन्होंने कहा, ”लेकिन इस बार यहां गन्ने पर जोर है.” गन्ना बीजेपी (विंध्य जनता पार्टी) का चुनाव चिन्ह है. कारण पूछे जाने पर दुबे ने कहा कि त्रिपाठी का यहां के लोगों से व्यक्तिगत संबंध है और वह समाज के हर वर्ग में लोकप्रिय हैं.

ये है इस सीट का इतिहास
त्रिपाठी ने 2003 में पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैहर से चुनाव जीता, लेकिन अगले चुनाव में वह बीजेपी के मोती लाल तिवारी से हार गए। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 2013 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। दूसरी बार विधायक बनने के ठीक दो साल बाद त्रिपाठी ने तीसरी बार पार्टी बदल ली और बीजेपी की सदस्यता ले ली. उनके इस्तीफे से खाली हुई मैहर सीट पर उपचुनाव जीतकर 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट पर बीजेपी का झंडा भी लहराया.

एक भी पुराना कार्यकर्ता बीजेपी के साथ नहीं है
चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाये जाने पर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी थी. ऐसे ही एक कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा प्रत्याशी के साथ एक भी पुराना कार्यकर्ता नहीं घूम रहा है. उन्होंने कहा, ”यहां तक ​​कि मोती लाल तिवारी (पूर्व बीजेपी विधायक) भी उनके साथ नहीं हैं, जबकि वह उनके रिश्तेदार हैं.” करीब 2.5 लाख वोटरों वाली इस विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंडवाना गणतंत्र पार्टी) चुनाव लड़ रही हैं. गोंगपा के संयुक्त प्रत्याशी वीरेंद्र कुशवाह भी चुनाव लड़ रहे हैं. वह 2003 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा के उम्मीदवार थे और दूसरे स्थान पर रहे थे। वह त्रिपाठी से हार गए थे.

पिछली बार कांग्रेस हार गई थी
पिछले (2018) विधानसभा चुनाव में गोंगपा प्रत्याशी रहे मनीष पटेल ने मैहर सीट से 33,397 वोट हासिल कर सभी को चौंका दिया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि पटेल की वजह से पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्रीकांत चतुर्वेदी को हार का सामना करना पड़ा था. पटेल इस चुनाव में कांग्रेस के समर्थन में हैं और घई के लिए प्रचार कर रहे हैं. पहले भी बसपा में रह चुके मनीष पटेल का क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है, लेकिन कई बार दल बदलने से उनकी छवि खराब हुई है।

अपरिभाषित

नया जिला बनने से लोगों को विकास की उम्मीद है
स्थानीय पत्रकार शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि समय के साथ मैहर का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि अब मैहर नया जिला बन गया है तो लोगों में उम्मीद जगी है, लेकिन इसका श्रेय लेने की होड़ में भाजपा और कांग्रेस के अलावा त्रिपाठी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘परंपरागत तौर पर यहां लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच होती रही है, लेकिन इस बार त्रिपाठी की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.’ मैहर के सेवानिवृत्त शिक्षक बीडी रस्तोगी ने कहा कि अगर कांग्रेस ने त्रिपाठी को टिकट दिया होता तो उनकी जीत निश्चित थी, लेकिन अब परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि भीतर से किसे कितना नुकसान होता है और कितनी महिलाएं आती हैं वोट देने के लिए बाहर. क्योंकि यहां की 50 हजार से ज्यादा महिलाओं को लाड़ली लक्ष्मी ब्राह्मण योजना का लाभ मिला है. अगर इनमें से 50 फीसदी भी बीजेपी के पक्ष में वोट करें तो चतुर्वेदी उभर सकते हैं. राज्य में चुनाव प्रचार का शोर बुधवार शाम को थम गया और अब राज्य विधानसभा की 230 सीटों के साथ-साथ मैहर में भी 17 नवंबर को मतदान होगा और नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किये जायेंगे.

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